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'डिजिटल क्रांति' समय की जरुरत

Posted On: 3 Oct, 2015 social issues में

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देश में डिजिटल क्रांति का शंखनाद हो चुका है।प्रधानमंत्री मोदी तकनीकी रथ पर सवार होकर लगाम पकडे देश के नौजवानों का आह्वान कर रहे हैं।तकनीकी रुप से देशवासियों को सशक्त बनाने के लिए वे स्वयं रोल मॉडल की भूमिका भी निभा रहे हैं।गौरतलब है कि विभिन्न मंचों से वे तकनीक की महत्ता को जाहिर भी करते रहे हैं।21वीं सदी के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में इस क्रांति की औचित्य है।यदि इसका उचित क्रियान्वन होता है तो इसी बहाने करोडों लोगों को तकनीक से जोडा भी जा सकता है।हाल ही दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा देने की घोषणा कर लाखों स्मार्टफोन उपभोक्ताओं का ध्यानाकर्षण किया था।वैश्विक स्तर पर देखें तो संचार के क्षेत्र में लगातार तरक्की की जा रही है।कहा जाता है कि तकनीक,तकनीक से जोडता है।इसलिए अगर हम तकनीक से जुडे नहीं रहते हैं तो नयी-नयी तकनीक भी हमारे नयन-दर्शन से दूर रह जाऐंगी।तब देश में वैसी ही स्थिति होगी जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी साइबर युद्ध को लेकर चिंता जाहिर करते हैं।वाकई आज के इस तकनीकी दौर में जो व्यक्ति सर्च इंजन और सोशल मीडिया से दूर हैं वे निश्चय ही तकनीक के मामले में गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत रह रहे हैं।सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों के अधिकांश प्रमाण पत्र आज आॅनलाइन हो गए हैं।कम से कम हरेक भारतीय को मोबाइल तथा सर्च इंजन का प्रयोग करना तो आना चाहिए।अन्यथा हम वैश्वीकरण के इस युग में तकनीकी रुप से पिछड जाएंगे।तकनीकी ज्ञान के अभाव के कारण आज ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बिचौलिए के शिकार हो रहे हैं।हालांकि अब वे भी तकनीकी शिक्षा पर जोर देने की शुरुआत कर रहे हैं।शायद इसलिए आज ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपनी बचत राशि को शौचालय निर्माण में लगाने की जगह मोबाइल खरीदने में खर्च करना चाह रहे हैं।इन्फर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट इंडिया के अनुसार भारत,इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता के मामले में 166 देशों की सूची में 129वें स्थान पर है।मतलब साफ है कि तकनीक के मामले में हम कितने पीछे हैं।इस दृष्टि से इस क्रांति का महत्व कई गुना बढ जाता है।इस अभियान की सफलता के मद्देनजर हमें शून्य स्तर से काम करने की जरुरत है ताकि निचले स्तर के लोगों को भी साथ लेकर चला जा सके।हालांकि हमें यह भी ध्यान में रखकर चलना होगा कि देश में बिजली किल्लत,सुस्त इंटरनेट,महंगी डेटा दर जैसी समस्याएं योजना के लिए बाधक बन सकती है।इसलिए डिजिटलीकरण के साथ-साथ बुनियादी मुद्दों पर भी काम करने की आवश्यकता है।तकनीक का बढता प्रयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अच्छा पहल कहा जाता है।प्रतिवर्ष शैक्षणिक कार्यों में टन की मात्रा में पेडों की कटाई की जाती है।सरकार के प्रयासों से विद्यार्थियों को तकनीकी रुप से साक्षर करने के लिए गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में दर्जन भर कम्प्यूटर की खरीदारी तो की गयी है लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि प्रयोग न होने के कारण तालाबंद कमरों में वे कम्प्यूटर धूल फांक रहे हैं।आलोचकों का मानना है कि जिस देश में भूख,कुपोषण,गरीबी,बेरोजगारी जैसी समस्याएं हैं वहां ऐसे कार्यक्रमों का कोई महत्व नहीं है।लेकिन वे गलत हैं।यदि नागरिकों की तकनीकी भूख को खत्म किया जाता है तो उसके माध्यम से उक्त समस्याओं का समाधान भी संभव है।

सुधीर कुमार'डिजिटल क्रांति' समय की जरुरत

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